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Drifting

Falling freely through seas of emptiness. Tossing, turning, drifting, lifeless. At the speed of light. Lost all count of time. Seeping thro...

Monday, 17 September 2012

सूनी - सूनी सी हैं

सूनी - सूनी सी हैं

रिम - झिम,  बरसे ये रैना
कैसे, कहू जो हैं केहना?

झूमें रे मन मेरा, भागे रे हर दिशा,
संभल पाऊ ना. ये क्या मुझे हुआ?

पास तू इतना, फिर भी तू क्यु जुदा?
आँखें बंद कर लू, पा-लू तुझे सदा.......


खोया - खोया रहू, लागे ना दिल मेरा
तेरे संघ ही ग़ाऊ हर इक गीत नया 

ख़्वाबों में तो मिलता हू, रोज़ ही हैं दीदार तेरा ,
पर इन बाहों को तो हैं इंतज़ार तेरा
सूनी - सूनी सी हैं
भीगी - भीगी सी हैं
ये सारी - सारी  रातें

जुडी - मुड़ी सी हैं
सिलगी - बुझी सी हैं
तेरे - मेरे दिलों की तारें

आओ,
मिल - जाओ

लग जाओ गले

आओ,
खो - जाओ

हो जाए हम एक ..





6 comments:

  1. Hindi poems just always blow me away. This one is a great piece!

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  2. Very beautiful, loved the rhyme and word selection. It can be made into a song. :)

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    1. this compliment coming from you is really flattering..
      thank you so much saruji :)

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